
सुनो…
कैसी हो तुम !
जैसे पहले दिन मेरे साथ थी ,क्या वैसी ही हो तुम ?
क्या पहले दिन जैसी चेहरे पर मुस्कान है तुम्हारे !
या ज़िंदगी से हारने की थकान है तुम्हारे ?
आज तुम्हारी याद आ रही है !
वो पहले वाली प्यार की फ़रियाद आ रही है !
ऐसा भी क्या हुआ था हमारे बीच ?
दिमाग़ में बस यही बात आ रही है !
छोड़ो…
मैं तो प्यार करता था तुमसे !
इसलिए शायद लड़ता था तुमसे !
पर इस बात को तुमने कुछ और ही समझ लिया !
मेरी सही बातों को भी गलत तरह से पकड़ लिया !
पर सच कहूँ तो.....
मेरे अच्छे होने के बावजूद तुम्हारी आँखों में नमी थी !
शायद मेरे प्यार में ही कुछ कमी थी !
मैं नहीं चाहता था हमारी आख़िरी बात ऐसी हो !
ख़ैर……
तुम बताओ कैसी हो ?


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